Friday, 10 January 2014

राहुल से नाराज हुए कई बड़े कांग्रेसी, पीएम प्रोजेक्‍ट करने पर भी मतभेद

राहुल से नाराज हुए कई बड़े कांग्रेसी, पीएम प्रोजेक्‍ट करने पर भी मतभेद

नई दिल्ली.  राहुल गांधी को पीएम प्रोजेक्‍ट करने को लेकर कांग्रेस के वरिष्‍ठ नेताओं की अलग-अलग राय सामने आई है। दिग्विजय सिंह का साफ मानना है कि अभी राहुल को पीएम प्रोजेक्‍ट नहीं करना चाहिए, जबकि सलमान खुशी इस राय के खिलाफ हैं। उधर, बताया जा रहा है कि राहुल भी पार्टी के वरिष्‍ठ नेताओं के कामकाज के तरीकों से खुश नहीं हैं। इसलिए जल्‍द ही वह नई टीम भी बना सकते हैं। राहुल की नाराजगी की वजह यह मानी जा रही है कि कांग्रेस के वरिष्ठ नेता उनके फैसलों को क्रियान्वित नहीं कर रहे हैं। इस वजह से राहुल को राष्‍ट्रीय राजनीति में गंभीरता से नहीं लिया जा रहा है। पार्टी के कई नेता भी राहुल गांधी के काम करने के अंदाज और पार्टी नेताओं के साथ उनके व्यवहार से नाखुश बताए जाते हैं। 
 
रीडिफ न्यूज के सूत्रों के मुताबिक, राहुल गांधी पिछले काफी दिनों से यह मांग करते रहे हैं कि वह और ज्यादा अधिकारों के साथ पार्टी और सरकार के फैसले लेना चाहते हैं। लेकिन ऐसा नहीं हो पा रहा है। लोकसभा चुनावों से ठीक पहले वह खुद की इस तरह की स्थिति से नाखुश हैं। सूत्रों का कहना है कि प्रियंका गांधी का अचानक से सक्रिय होने की यह वजह है। प्रियंका गांधी पार्टी के नेताओं और राहुल गांधी के बीच मध्यस्थता का काम रही हैं। 
 
प्रियंका गांधी ने मंगलवार को कांग्रेस के वरिष्ठ नेताओं के साथ मुलाकात की थी। बताया जा रहा है कि आने वाले दिनों में भी यह सिलसिला चलता रहेगा। 
 
यह भी बताया जा रहा है कि नाराजगी के कारण ही राहुल ने 10 जनवरी को प्रस्‍तावित अपने लोकसभा क्षेत्र अमेठी का दौरा रद्द कर दिया। सूत्रों की मानें तो राहुल गांधी लोकसभा चुनाव अपनी मां सोनिया गांधी के लोकसभा क्षेत्र रायबरेली से लड़ना चाहते हैं। आम आदमी पार्टी के कुमार विश्वास के अमेठी से लोकसभा चुनाव लड़ने की घोषणा कर चुके हैं। ऐसे में अब राहुल का अमेठी से चुनाव न लड़ना एक गलत संदेश देगा।  
 
सूत्रों का कहना है कि जब से राहुल गांधी ने संगठन की जिम्मेदारी संभाली है और अपने मुताबिक फैसले करने की कोशिश की है, तब से पार्टी के भीतर स्थिति बिगड़ने लगी है।
राहुल से नाराज हुए कई बड़े कांग्रेसी, पीएम प्रोजेक्‍ट करने पर भी मतभेद
दिग्विजय ने कहा- चुनावों से पहले घोषित नहीं होना चाहिए प्रधानमंत्री पद का प्रत्याशी 
 
राहुल गांधी की प्रधानमंत्री पद के प्रत्याशी के तौर पर घोषणा से ठीक पहले कांग्रेस में मतभेद सामने आ रहे हैं। दिग्विजय सिंह ने पत्रकारों से चर्चा के दौरान कहा कि चुनावों से पहले पार्टी को पीएम पद का प्रत्याशी घोषित नहीं करना चाहिए। 
 
वहीं केंद्रीय मंत्री सलमान खुर्शीद ने कहा कि घोषणा कब होती है, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता। हम तो राहुल को अपना नेता मान चुके हैं। पिछले महीने सोनिया गांधी ने कहा था कि सही समय पर पार्टी के पीएम पद के प्रत्याशी की घोषणा होगी। यह चर्चाएं हैं कि 17 जनवरी को कांग्रेस कमेटी की बैठक में राहुल को प्रधानमंत्री पद का प्रत्याशी बनाया जा सकता है। इस पर दिग्विजय ने कहा कि ‘राष्ट्रीय मीडिया और राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा छिड़ी है। ऐसे में मुझे लगता है कि कांग्रेस अध्यक्ष (सोनिया गांधी) ने भी संकेत दिए हैं... वह घोषित करेंगी। तो ऐसे में पार्टी और कांग्रेस अध्यक्ष को फैसला करने दीजिए।’ 
 
 
राहुल गांधी की प्रधानमंत्री पद के प्रत्याशी के तौर पर घोषणा से ठीक पहले कांग्रेस में मतभेद सामने आ रहे हैं। दिग्विजय सिंह ने पत्रकारों से चर्चा के दौरान कहा कि चुनावों से पहले पार्टी को पीएम पद का प्रत्याशी घोषित नहीं करना चाहिए। 
 
वहीं केंद्रीय मंत्री सलमान खुर्शीद ने कहा कि घोषणा कब होती है, इससे कोई फर्क नहीं पड़ता। हम तो राहुल को अपना नेता मान चुके हैं। पिछले महीने सोनिया गांधी ने कहा था कि सही समय पर पार्टी के पीएम पद के प्रत्याशी की घोषणा होगी। यह चर्चाएं हैं कि 17 जनवरी को कांग्रेस कमेटी की बैठक में राहुल को प्रधानमंत्री पद का प्रत्याशी बनाया जा सकता है। इस पर दिग्विजय ने कहा कि ‘राष्ट्रीय मीडिया और राष्ट्रीय स्तर पर चर्चा छिड़ी है। ऐसे में मुझे लगता है कि कांग्रेस अध्यक्ष (सोनिया गांधी) ने भी संकेत दिए हैं... वह घोषित करेंगी। तो ऐसे में पार्टी और कांग्रेस अध्यक्ष को फैसला करने दीजिए।’ 

राहुल से नाराज हुए कई बड़े कांग्रेसी, पीएम प्रोजेक्‍ट करने पर भी मतभेद
 
 
 
 
लोकसभा चुनावों की तैयारियों से पहले कांग्रेस का परंपरागत 'वार रूम' अब नए रंग-रूप में तब्दील हो गया है। इसे 'मीडिया हब' नाम दिया गया है। कांग्रेस के 'मीडिया हब' में रिसर्चरों की बड़ी टीम को पार्टी नेताओं की ट्रेनिंग के लिए रखा गया है। प्रोफेशनल इमेज मैनेजमेंट फर्म को इस काम का जिम्मा सौंपा गया है। फर्म की सलाह के हिसाब से पार्टी नेता और प्रवक्ता मीडिया का सामना करेंगे।
 
ऑडियो-वीडियो कैंपेन के सहारे कांग्रेस के नेताओं ने रिहर्सल करना भी शुरू कर दिया है। उन्हें सिखाया जा रहा है कि वह कैसे यूपीए की दस सालों की उपलब्धियों को जनता के सामने रखें। नेताओं को क्या कहना है और क्या पहनना है? इसकी भी ट्रेनिंग दी जाएगी।
 
देश की सबसे पुरानी राजनीतिक पार्टी अब राहुल गांधी और इमेज मैनेजमेंट फर्म की सलाह के हिसाब से तैयारी कर रही है। पार्टी पुराने 'वार रूम' 15, रकाबगंज को भी छोड़ने जा रही है। 
 
पार्टी के एक नेता ने गोपनीयता की शर्त पर एक अखबार को बताया, 'रकाबगंज स्थित 'वार रूम' कांग्रेस अध्यक्ष के राजनीतिक सलाहकार अहमद पटेल का ऑफिस होने के कारण अभी तक पहचाना जाता रहा है। लेकिन, अब राहुल गांधी खुद संगठन में अहम रोल निभा रहे हैं, लिहाजा अब फोकस उन पर शिफ्ट हो गया है। लिहाजा, नया बैक रूम या तो राहुल गांधी का ऑफिस होगा या फिर पार्टी नॉर्थ या साउथ एवेन्यू में एक अलग जगह का चुनाव करेगी। यह उपलब्धता पर निर्भर करेगा।'
 
ऐसा काम करेगा कांग्रेस का 'मीडिया हब'
 
क्या करेगा- मीडिया हब पार्टी के अगले छह महीनों के प्लान और कैंपेन को कोऑर्डिनेट करेगा।
कौन करेगा- मीडिया हब का प्रबंधन काग्रेस नेताओं के नेतृत्व में रिसर्चरों की टीम करेगी।
कैसे करेगा- यह नेताओं के भाषणों के अलावा उन्हें क्या और किस रंग के कपड़े पहने चाहिए? आदि चीजों का भी सुझाव देगा।
मी़डिया मैनेजमेंट- मीडिया हब पार्टी प्रवक्ताओं को अलग-अलग न्यूज चैनल भी असाइन करेगा। यानी किस चैनल की डिबेट में पार्टी की ओर से कौन हिस्सा लेगा, इसका फैसला भी मीडिया हब ही करेगा। 

राहुल से नाराज हुए कई बड़े कांग्रेसी, पीएम प्रोजेक्‍ट करने पर भी मतभेद
कांग्रेस ने 17 जनवरी को होने वाली अहम बैठक से पहले राज्यों के लिए स्क्रीनिंग कमेटियां गठित कर दी हैं। ये कमेटियां अगले लोकसभा चुनावों के लिए उम्मीदवारों का चयन करेंगी। स्‍क्रीनिंग कमेटी में पूर्व रेल मंत्री पवन बंसल को भी जगह दी गई है। कांग्रेस महासचिव जनार्दन द्विवेदी ने गुरुवार रात इसकी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि लोकसभा चुनाव के लिए पार्टी अध्यक्ष सोनिया गांधी ने कमेटियों को मंजूरी दे दी है। सूत्रों का कहना है कि 17 जनवरी की अहम बैठक के तुरंत बाद स्क्रीनिंग कमेटियों को भी बैठक होगी। इसके बाद 150 से 200 दावेदारों की एक सूची जनवरी के आखिर तक आ सकती है। लोकसभा चुनाव अप्रैल-मई में होने के आसार हैं। इससे दावेदारों को तैयारियों के लिए तीन महीने का वक्त मिल जाएगा।
 
 कांग्रेस की 17 जनवरी को होने वाली ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी (एआईसीसी) की बैठक लोकसभा चुनाव के लिहाज से सबसे अहम मानी जा रही है। लिहाजा इसके लिए कांग्रेस कोई कसर नहीं छोड़ना चाहती है। सूत्रों के मुताबिक एआईसीसी की बैठक के रेजोल्यूशन को तैयार कराने के लिए विशेषज्ञों की सेवाएं ली जा रही हैं। रेडिफ न्यूज की खबर के मुताबिक,  दो वरिष्ठ वकीलों, चार वरिष्ठ संपादकों और दो रिटायर्ड ब्यूरोक्रेट्स कांग्रेस के संकल्प पत्र का ड्राफ्ट तैयार कर रहे हैं। इससे अलग एक विशेषज्ञ दल इसकी भाषा को लेकर भी समीक्षा करेगा। पार्टी के अंदरुनी सूत्रों का कहना है कि यह काम अभी तक प्रणब मुखर्जी किया करते थे। 
 
सूत्रों का कहना है कि कांग्रेस के संकल्प पत्र में सीधा निशाना बीजेपी को बनाया जाएगा। दिल्ली में 32 सीटें जीतकर भी सरकार ने बनाने की बीजेपी की असफलता को पार्टी रेजोल्यूशन में खास जगह देगी। इसे लेकर पार्टी बीजेपी पर हमले करेगी। हालांकि, कांग्रेस का रेजोल्यूशन आम आदमी पार्टी पर निशाना साधने से बचेगा। 
 
उधर, प्रधानमंत्री के तौर पर राहुल को जनता की तीसरी पसंद बताने वाले सर्वे को कांग्रेस ने बकवास बताया है। अंग्रेजी अखबार 'टाइम्‍स ऑफ इंडिया' के लिए मार्केट रिसर्च एजेंसी IPSOS द्वारा किए गए सर्वे में पीएम के तौर पर राहुल को मोदी और केजरीवाल के बाद तीसरे नंबर पर रखा गया है। ऑल इंडिया कांग्रेस कमेटी के सचिव हरिप्रसाद ने कहा, 'सर्वे रिपोर्ट हमेशा उनका फेवर करती है जिसने उन्हें इस काम के लिए चुना है। पिछले सर्वे में छत्तीसगढ़ में कांग्रेस को 19 सीट मिलने की बात कही गई थी लेकिन हमें 39 सीट मिली।एमपी और राजस्थान के परिणाम भी सर्वे के उलट ही रहे।'
आठ शहरों में किए गए सर्वे में पार्टी को दूसरे नंबर पर बताया गया है। हालांकि, जब हरिप्रसाद से लोकसभा चुनावों की तैयारियों की समीक्षा के बारे में सवाल किया गया तो उन्होंने कहा, 'मैं यह सब चीजें आपसे क्यों साझा करूं?'


राहुल से नाराज हुए कई बड़े कांग्रेसी, पीएम प्रोजेक्‍ट करने पर भी मतभेद
प्रियंका के बैठक में पहुंचने से बड़े नेता भी रह गए थे सन्न 
 
चुनावी तैयारियों का जायजा लेने के लिए राहुल गांधी के आवास पर मंगलवार को आयोजित बैठक में प्रियंका गांधी के आने से मीडिया में ही नहीं बल्कि पार्टी के भीतर भी सनसनी फैल गई थी। सूत्रों का कहना है कि प्रियंका के बैठक में शामिल होने को लेकर पहले से किसी को जानकारी नहीं थी। 
प्रियंका गांधी जब अचानक बैठक में हिस्सा लेने पहुंची तो कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी और उपाध्यक्ष राहुल गांधी के पार्टी नेताओं को कॉल्स आने शुरू हो गए थे। कांग्रेस महासचिव जनार्दन द्विवेदी को पार्टी अध्यक्ष और उपाध्यक्ष की ओर से तुरंत  निर्देश दिए गए कि बैठक के ठीक बाद वह प्रियंका की बैठक में उपस्थिति के बारे में मीडिया को स्पष्टीकरण दें। 
यही नहीं राहुल गांधी के आवास पर आयोजित बैठक के बीच जब एके एंटनी, अंबिका सोनी और मोतीलाला वोहरा को फोन कॉल्स आने शुरू हुए तो वह भी सकते में आ गए थे।  

Source : http://www.bhaskar.com/article/NAT-cong-outsources-drafting-of-aicc-resolution-4489509-PHO.html?google_editors_picks=true

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